Choose people who choose you.
Status / Attitude
Discover how your attitude can transform your life. This section delves into techniques for enhancing your personal influence and building resilience. Embrace a growth mindset and unlock your potential!
हाँ मै बदल गयी हूँ अब मै जाने वालो को रास्ता देती हूँ वास्ता नहीं!!
में तो पहले से बदनाम हु तुम शरीफ लोग मेरा क्या उखाड़ लोगे
खामोश हूँ बेजुबान नहीं, 'शिकारी' हूँ किसी का शिकार नहीं ।
खेल तो तेरे साथ भी खेला 😠 जाएगा लेकीन नियम हमारे होंगे ! 😎
रिश्ते अगर बिखर जाए तो आग लगाने वाले बढ़ जाते है,
जीना है तोह ऐसे जियो की पिता को भी लगे के हा मैंने एक शेर पाला हैं
लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं
हमारी सोच और पहचान दोनो ही, तेरी'औकात' से बाहर हैं।
जलना जलाना यह सब फ़ुज़ूल है , अपने काम में मस्त रहना यह अपना उसूल है
जो हमसे बात नहीं करते, वो दूसरों से हमारी ‘बात’ करते है ।
ज़ारा दिल का दर्द कम होने दो फ़िर लोगों की उनकी औक़ात याद दिलाएंगे
No more expectations from anyone.
सुना था लोगों से की वक्त बदलता है, अब वक्त ने बताया की लोग भी बदलते है ।
जिसे आज मुजमे हजार एब नजर आते हे , कभी वही लोग हमारी गलती पे भी ताली बजाते थे
उसने कहा बहुत हैं तेरे जैसे, मैंने कहाँ अरे पागल, Brand हूँ Copy तो होगी ना.
मत कोशिश करो मुझ जैसा बनने की. क्यूंकि शेर पैदा होते है बनाए नहीं जाते !!
तुम बदलकर तो देखो , हम पलटकर भी न देख़ेगे।।
तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे
हमारा नाम इतना भी कमज़ोर नहीं जो 2/4 कुत्तों के भोकने से बदनाम हो जाये
बदले नहीं हे हम बस जान गए हे दुनिया को
यह दिल ही है जिसे हारने की आदत हो गई है, वरना जहां भी हमने दिमाग लगाया है, वहां फतेह ही पाई है..!😎
हम दुनिया से अलग नहीं हमारी दुनिया ही अलग है
शायद कुछ लोग भूल गए है अपनी औक़ात लगता है फिर मैदान में आना पड़ेगा
हमारे बीच अब कोई ताल्लुकात नही रहा बाकी, तुम्हारी मर्जी अब जो चाहे सोच सकते हो.......!!
“बादशाह बनो शेर जैसे वरना डराना तो कुत्ते भी जानते हैं”
हर वो आवाज़ दबानी है, जिसने कहा था तुमसे ना हो पाएगा !
एक हार से कोई फकीर और एक जीत से कोई सिकंदर नहीं बनता..!!💯
हमारा Style और Attitude ही कुछ लग है, बराबरी करने जाओगे तो बिक जाओगे..😎
माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं
लाख तलवारे बढ़ी आती हों गर्दन की तरफ, सर झुकाना नहीं आता तो झुकाए कैसे.