मुझे अब महफिलों में लौट कर आना पड़ेगा, फर्क होता है बाप और बेटे में, बताना पड़ेगा।😠
Status / Attitude
Discover how your attitude can transform your life. This section delves into techniques for enhancing your personal influence and building resilience. Embrace a growth mindset and unlock your potential!
ज़िद्दी हु गुस्से वाला हु बद्तमीज़ हु बेपरवाह भी हु लेकिन मेने कभी किसी को धोखा नहीं दिया
जो गया उसे जाने दो प्यार ही तो था कहीं और से आने दो
जीने का असली मजा तो तब है दोस्तों जब दुश्मन भी तुमसे हाथ मिलाने को बेताब रहे..! 💯 🔥
मिट्टी के बने है साहब, घमंड हमे जचता नहीं 💯
ज़माने में आये हो तो जीने का हुनर भी रखना.. दुश्मनों से कोई खतरा नहीं बस अपनो पे नजर रखना.....
हम सादगी में झुक क्या गए, तुमने तो हमे गिरा हुआ समझ लिया |😠
दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है
दिल में चाहत का होना जरूरी है…वरना, याद तो रोज दुश्मन भी करते हैं |
सिर्फ तेरे दीदार के लिये आते हैं तेरी गलियों में, वरना आवारगी के लिये तो पूरा शहर पड़ा है !!"
हम बादशाहो के बादशाह हैं, ये गुलामो वाली हरकत हमसे नहीं होती।
Yes, I’m smiling. But you’re not the reason anymore.
Once i lose interest it’s over .
अगर कोई आपको, नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं, आप उससे उप्पर हैं...
तुझे क्या लगता है तेरे जाने से गम होगा, नहीं मेरी जान बस एक कॉन्टैक्ट कम होगा
उसूलों पे चलना एक मेहेंगा शौक है, जो हर दो टके के इंसान के बस की बात नही..! 💯
कितना भी समेट लो.. हाथों से फिसलता ज़रूर है.. ये वक्त है साहब.. बदलता ज़रूर है..!!❤️
दुनिया कहा चुप रहती है कहने दो जो कहती है
जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
"आदमी का अमीर होना जरूरी नहीं है जमीर होना जरूरी है।" 💯
हम लुट गए क्योंकि मोहब्बत की थी उनसे...वर्ना दुश्मनी करने वाले तो हमारे नाम से ही काँपते हैं।
तू चालाकी से कोई चाल तो चल, जीतने का हुनर मुझ में आज भी हैं ! 😎
If you want me let me know. If you don't, please gently let me go.
हमारे सामने ज्यादा हीरो बनाने की कोशिश भी मत करना क्योंकि हम तालियों से ज्यादा गालियों से स्वागत करते है
दुश्मनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी में हाथ नहीं उठता बस नज़रों से गिरा देता हूँ
साथ बैठने की औकात नहीं थी उसकी, जिसको मैंने सर पर बिठा रखा था..!!😠
मेरी सोच और मेरी पहचान, दोनों ही तेरे औकात से बाहर है!
शरीफ इंसान शराफत की वजह से चुप रह गया | बदमाश ने समझा की उसे जवाब देना ही नहीं आता !
अभी तो हम मैदान में उतरे भी नहीं और लोगों ने हमारे चर्चे शुरू भी कर दिए ..!
मैं कुछ खास तो नही हुँ लेकिन, मेरे जैसे लोग कम है
झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .