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दशहरे के इस पवित्र पर्व पर, आपके जीवन में विजय का शंखनाद हो। हर बुराई पर अच्छाई की जीत हो, सुख-समृद्धि का वास हो। विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Status / Attitude

Discover how your attitude can transform your life. This section delves into techniques for enhancing your personal influence and building resilience. Embrace a growth mindset and unlock your potential!

Never Love Someone At The Cost Of Your Dignity And Self Respect...!!!

चिढ़ते हैं वो मुझसे , जिनसे brabri नही होती मेरी |

खुदा ने मुझे बहुत वफ़ादार दोस्तों से नवाज़ा है याद मैं ना करूं तो कोशिश वो भी नहीं करते |

जैसी DP वैसा मैं !!

ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए , इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए

खौफ तो आवारा कुत्ते भी मचाते है पर दहशत हमेशा शेर की ही रहती है

तमीज में रहिये जनाब इज़्जत मुफ्त में दूंगा

"बादशाह नहीं बाज़ीगर से पहचानते हैं लोग हमें, क्योंकि हम रानियों के सामने झुका नहीं करते !!"

खुद की पहचान बनाने में जो मजा है, वो किसी की परछाई बनने में नहीं।💯

Ek वो ‪pagali‬ हैं जो मुझे समजती nahi..Or यहाँ Jamana मेरे ‪Status‬ ko dekhke दीवाना हुआ Ja रहा है

मैने खेल हमेशा खुद के दम पर खेले है इसलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है

अच्छी किताबे,और अच्छे लोग..! तुरंत समझ में नहीं आते, उन्हें पढ़ना पड़ता है..

रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .

Seeing your ex go through what they put you through.. Priceless.

“मशहूर होने का शोक नहीं है, लेकिन क्या करे लोग नाम से ही पहचान लेते है।” 😎😎

उन हवाओं से भी जल्द सामना होगा, जो आजकल हमारे खिलाफ चल रही है !

कोशिश तो सबकी जारी है, वक़्त बताएगा कोन किसपे भारी है..|✌🏽💪

अकेला रहता हूँ नवाब की तरहा छोटे झुण्ड में रह कर कुत्ता बनने की आदत नहीं

औकात नहीं है दुश्मनो की आँख से आँख मिलाने की, और बात करते हैं साले घर से उठाने की..!!

मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..

जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!

मेरी बदमाशी का अंदाज़ा इससे लगाओ जब मैं 😎 शरीफ था तब भी लोग मुझे बदमाश ही कहते थे। 😠

हाँ मै बदल गयी हूँ अब मै जाने वालो को रास्ता देती हूँ वास्ता नहीं!!

"चुप हूँ तो खुद को शहनशाह मत समझ बोलने पर आया तो तुझे तेरी औकात दिखा दूंगा..!

मैं जानता हूं कहां तक उड़ान है उनकी, मेरे ही हाथ से निकले हुए परिंदे हैं !🥱

गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई

कितना भी समेट लो.. हाथों से फिसलता ज़रूर है.. ये वक्त है साहब.. बदलता ज़रूर है..!!❤️

लोगो से डरना छोड़ दो इज़्ज़त खुदा देता है लोग नहीं

लोग अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं मेरी आदतों से रुतबा कम ही सही पर लाजवाब रखता हूँ !!"

सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं