चाह कर भी उनका हाल नहीं पूछ सकते डर है कहीं कह ना दे कि ये हक्क तुम्हे किसने दिया
Status / Attitude
Discover how your attitude can transform your life. This section delves into techniques for enhancing your personal influence and building resilience. Embrace a growth mindset and unlock your potential!
अजीब सी आदत है अपनी, नफरत हो या मोहब्बत बड़ी शिद्दत से करते हैं ।🔥🔥
लोग दिखावे के दीवाने है और हम है की "सच्चाई" मुंह पर बोल देते है...!
आप होशियार है अच्छी बात है, पर हमें मूर्ख ना समझे यह उससे भी अच्छी बात है !🖕🖕
ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए , इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
तुम बदलकर तो देखो, हम पलटकर भी न देख़ेगे।।😊
शोर करने वाले अगर खामोश हो जाये तो उनकी ख़ामोशी से सुकून नहीं खौफ आता है
अगर कोई लड़का आपको सच्चा प्यार करता है , तो उसकी Felling's को समझो खुद को हीरोइन मत समझो
खुद की पहचान बनाने में जो मजा है, वो किसी की परछाई बनने में नहीं।💯
शेर के खामोश हो जाने से जंगल कभी कुत्तो का नही हो जाता।
रहना है तो मेरा रहे वरना जिसका होना हो , हो ले अब कोई मगजमारी नहीं.
हाथ में घड़ी ⌚ कोई भी बंदी हो… लेकिन वक़्त अपना होना चाहिए 💯
होगा कीमती वक्त ⌚ आपका, पर हम भी हर किसी से नहीं मिला करते!!😎
बादशाह नही, टाइगर हूँ मैं,इसलिए लोग इज्ज़त से नही, मेरी इजाज़त से मिलते है।
खेल ताश का हो या जिंदगी का , अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो
कुछ देर की खामोशी है फिर कानो मैं शोर आएगा , तुम्हरा तोह सिर्फ वक़्त है हमारा दौर आएगा
हाँ मै बदल गयी हूँ अब मै जाने वालो को रास्ता देती हूँ वास्ता नहीं!!
ना पेशी होगी, न गवाह होगा, अब जो भी हमसे 😠 उलझेगा बस सीधा तबाह होगा | 🔥
Im not selfish but whats Mine is MINE . End of story
एक्का चाहे कितना भी शातिर क्यो न हो, आख़िर रानी तो बादशाह 😎 की ही होती है..
तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे
गलतफहमी में ना रहना की जो लिखता हूँ तेरे लिए लिखता हूँ, क्यूँकि मेरे शब्द इतने सस्ते नही की तुझपे जाया करूँ।😠
मेरे इश्क़ की दुनिया, धुंआ धुंआ सी लगती है लगता है किसी ने आग लगा दी है...
यू ना कहो के ये किस्मत की बात है... मुझे बर्बाद करने में तुम्हारी भी हाथ है...
चलो आज फिर थोडा मुस्कुराया जाये, बिना माचिस के कुछ लोगो को जलाया जाये |
रिश्ते अगर बिखर जाए तो आग लगाने वाले बढ़ जाते है,
औकात सोच से बनती है, पैसों से नही |
शायद कुछ लोग भूल गए है अपनी औक़ात लगता है फिर मैदान में आना पड़ेगा
लाख तलवारे बढ़ी आती हों गर्दन की तरफ, सर झुकाना नहीं आता तो झुकाए कैसे.
मेरी सोच और मेरी पहचान, दोनों ही तेरे औकात से बाहर है!
हमे किसी कि दिल से खेलने कि आदत नहीं और कोई हमारे दिल से खेले इतनी किसी में ताकत नहीं 😎