चंद पल साथ रहा फिर जुदा हो गया एक शख़्स न जाने कब खुदा हो गया |
Status / Alone
Explore the enriching experience of solitude. Learn how being alone can enhance your self-awareness, promote personal development, and lead to greater mental clarity. Discover practical tips and insights to embrace your alone time.
मुद्दतें हो गईं हैं चुप रहते , कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते
उस हंसती हुई तस्वीर को क्या मालूम की कोई उसे देख कितने रोता है
i am single because i would rather be alone than be with a guy who makes me feel alone.
कैसे कह देते हैं लोग रात गई बात गई, यहां जमाने गुज़र जाते हैं दिल पर लगी बात को भुलाने में |
Remember when i said i am fine? Yeah, I lied.
माना की मरने वालों को भुला देतें है….सभी ...मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी…
Another month. Another year. Another smile. Another tear. Another winter and another summer too. But there can never be another you.
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
हम खुद से बिछड़े हुये लोग हैं, तुमसे क्या मिल पायेंगे |
कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं.. मौत इंसानों को आती है यादों को नहीं
सवरने का तो सवाल ही नहीं उठता, हम तो बिखरे ही लाजवाब है,,!! ❤
बेशक मोहब्बत ना कर पर बात तो कर, तेरा यु खामोश रहना बड़ी तकलीफ देता है..
यूँ ही भटकते रहते हैं अरमान तुझसे मिलने के, न ये दिल ठहरता है न तेरा इंतज़ार रुकता है
ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही
Sometimes you just have to stay silent because no words can explain what’s going on in your mind and heart.
यक़ीं न आए तो इक बार पूछ कर देखो जो हँस रहा है वो ज़ख़्मों से चूर निकलेगा...
याद तो रोज करते है उन्हें , पर उन्होने कभी महसूस ही न किया.. 😌
Dont cry over someone who wouldnt cry over you.
वो मेरी मोहब्बत है, और मैं सिर्फ उसकी एक आदत !
रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है
जाने का कोई इरादा नहीं था, पर रुककर भी क्या करते, जब तू ही हमारा नहीं था 💔
वादों की तरह इश्क भी आधा रहा, मुलाकातें कम रही इंतजार ज्यादा रहा.
it's hard for me to stay away from you
मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं
कुछ ख्वाहिंशे कुछ चाहते अभी बाकी है..❣️❣️टूटकर भी लगता है … टूटना अभी बाकी है
बिन धागे की सुई सी बन गई है ये ज़िंदगी ...सिलती कुछ नहीं ... बस चुभती चली जा रही है ...
अल्फ़ाज़ के कुछ तो कंकर फ़ेंको, यहाँ झील सी गहरी ख़ामोशी है।”
कभी कभी मेरा दिल करता है कि बैठकर इतना रोऊ कि रोते रोते ही मर जाऊ
मोत से पहेले भी ऎक मौत होती हे..! देखो जरा तुम जुदा होकर किसी से..!