मेरे दिल का दर्द किसने देखा है, मुझे बस खुदा ने तड़पते देखा है ,हम तन्हाई में बैठे रोते है,लोगो ने हमे महफ़िल में हस्ते देखा है।

गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका

साजिशों का पहरा होता है हर वक़्त रिश्ते भी बेचारे क्या करें, टूट जाते हैं बिखर कर...

मोहब्बत नहीं है उसे मुझसे ये जानता हूँ मैं फिर भी ये बात कहाँ मानता हूँ मैं

जाने कैसे हो जाते हैं लोग कभी इसके कभी उसके और फिर किसी और के

ये जो ज़िन्दगी है ना . तेरे बिन अधूरी है

एक नफरत ही हैं जिसे दुनिया चंद लम्हों में जान लेती हैं…वरना चाहत का यकीन दिलाने में तो जिन्दगी बीत जाती हैं ।

तेरे इश्क ने सरकारी दफ्तर बना दिया दिल को, ना कोई काम करता है,ना कोई बात सुनता है .....

एक खता रोज कर रहे हम, जो मिलेगा नहीं उसी पर मर रहे है हम.

ठोकर खाया हुआ दिल है साहब भीड़ से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है.

क्यूँ उदास बेठे हो इस तरहा अंधेरे मैं, दुःख कम नहीं होते रौशनी बुझाने से

sometimes it’s better to say nothing

my “okay” will never be okay

भूल सा गया हैं बो मुझे , समज नहीं आ रहा की हम आम हो गए उनके लिए या कोई खास बन गया है !

Hiding your feelings isnt the easy way out but sometimes its the only thing you can do.

मुद्दतें हो गईं हैं चुप रहते , कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते

कभी ये मत सोचना की याद नहीं करते , हम रात की आखिरी और सुबह की पहली सोच हो तुम

sadly, i'm not enough for the person who i considered my everything

नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.

वादों की तरह इश्क भी आधा रहा, मुलाकातें कम रही इंतजार ज्यादा रहा.

i wish i could ignore you the way you ignore me.

जिंदगी देने वाले , मरता छोड़ गये, अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये, जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की, वो जो साथ चलने वाले, रास्ता मोड़ गये”

My thoughts always destroy my mood

जबरदस्ती की नजदीकियों से सुकून की दूरियां ही अच्छी हैं.!

At Childhood we cry loudly to get what we like, but when Grown up we cry silently to forget what we like.

तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती

यूँ ही भटकते रहते हैं अरमान तुझसे मिलने के, न ये दिल ठहरता है न तेरा इंतज़ार रुकता है

तन्हा रातें कुछ इस तरह से डराने लगी मुझे, मैं आज अपने पैरों की आहट से डर गया..!!🥺🥺

कुछ खामोश कुछ गुमशुदा से हैं, हम आज तेरे बिन खुद से जुदा जुदा से हैं हम 🥺🥺

मेरी मोहब्बत की कातिल मेरी ग़रीबी ठहरी उसे ले गए ऊँचे मकाँ वाले....!