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इश्क़ की किताब का उसुल है जनाब..मुड़ कर देखोगे..तो महोब्बत मानी जाएगी..

Status / Alone

Explore the enriching experience of solitude. Learn how being alone can enhance your self-awareness, promote personal development, and lead to greater mental clarity. Discover practical tips and insights to embrace your alone time.

तुम चाहते तो निभा भी सकते थे, मगर तुमने ऐसा कभी चाहा ही नहीं.

खुद से बातें करने लगी हूँ, वैसे भी आजकल लोग सुनते कहाँ हैं ,

ना ढूंढ मेरा किरदार दुनिया के भीड़ में, वफ़ादार तो हमेशा तन्हा ही मिलते है..💯💯

कभी कभी मेरा दिल करता है कि बैठकर इतना रोऊ कि रोते रोते ही मर जाऊ

pretending to be okay is not easy at all

कोई रूह का तलबगार मिले तो हम भी महोब्बत कर ले… यहाँ दिल तो बहुत मिलते है,बस कोई दिल से नहीं मिलता

फ़ासले तो बढ़ा रहे हो मगर इतना याद रखना, मुहब्बत💗बार बार इंसान पर मेहरबान नहीं होती👏…!!

ना शाखों ने जगह दी ,, ना हवाओं ने बख्शा..! मैं हूँ टुटा हुआ पत्ता . आवारा ना बनता तो क्या करता

Its better to break your own heart by leaving, rather than having that person break your heart every day you are with them.

कितना होशियार है 😂 मेरा यार.. तोहफे में घड़ी तो दे दी लेकिन वक़्त नहीं|

overthinking is my partner at night

एक खता रोज कर रहे हम, जो मिलेगा नहीं उसी पर मर रहे है हम.

Another month. Another year. Another smile. Another tear. Another winter and another summer too. But there can never be another you.

जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते है

BestLieEver "I will always love you."

तेरी आँखों👀से यूँ तो सागर भी पिए है मैंने💧…तुझे क्या खबर जुदाई के दिन कैसे जिए है मैंने…!!

Sometimes, only pain and patience can prove it.

उसने पुछा जिंदगी किसने बरबाद की । हमने ऊँगली उठाई और अपने ही दिल पर रख ली ।

वक़्त पर ना जा वक़्त तो हर ज़ख्म की दावा है, आज तुमने हमे भुला दिया कल तुम्हे भी कोई भुला देगा

पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ..!

“जो रहते हैं दिल में, वो जुदा नही होते, कुछ अहसास लफ़्ज़ों में बयान नही होते

My biggest problem is overthinking everything

ख्वाहिश थी उस रिश्ते को बचाने की… और बस इक यही वजह थी मेरे हार जाने की…

रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा

सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम

उसका वादा भी अजीब था , कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे मैंने भी ये नहीं पुछा की, मोहब्बत के साथ….. या यादों के साथ…

रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।

दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?

कैसे कह देते हैं लोग रात गई बात गई, यहां जमाने गुज़र जाते हैं दिल पर लगी बात को भुलाने में |

काम तो कुछ करती नहीं थक जाती हूँ बस तुम्हेे सोचते सोचते...।।