तेरे सिवा कौन ‎समा सकता है ‎मेरे दिल में, रूह भी गिरवी रख दी है मैंने ‎तेरी चाहत में।

दुनियाँ में इतनी रस्में क्यों हैं, प्यार अगर ज़िंदगी है तो इसमें कसमें क्यों हैं।