"वो एक ख़त जो उसने कभी लिखा ही नहीं ! मैं हर रोज़ उसका जवाब तलाश करता हूँ !!"
"जिस्म के ज़ख्म का इलाज तो मुमकिन है ! लेकिन रूह के ज़ख्म का हकीम नहीं कोई !!"
धोखा देने के लिए शुक्रिया तेरा ! तुम न मिलती तो दुनिया की समझ न आती !!"
"मोहब्बत और नौकरी में कोई फर्क नहीं ! इंसान करता रहेगा, रोता रहेगा पर छोड़ेगा नहीं !!"
"अभी धूप निकलने के बाद भी जो सोया है ! वो ज़रूर तेरी याद में रातभर रोया है !!"
"तमन्नाओ की महफ़िल तो हर कोई सजाता है ! पर पूरी उसकी होती है जो तक़दीर लेकर आता है !!"
अपनी पीठ से निकले खंजरों को जब गिना मैंने ! ठीक उतने ही निकले जितनो को गले लगाया था मैंने !!"
"अगर क़िस्मत लिखने का हक़ मेरी माँ का होता ! तो मेरी ज़िन्दगी में एक भी ग़म न होता !!"
"कौन समझ पाया आज तक हमें ! हम अपने हादसों के अकेले गवाह हैं !!"
"आँसुओ का कोई वज़न नहीं होता ! लेकिन निकल जाने पर मन हल्का हो जाता है !!
. "मेरी कोशिश हमेशा से नाकाम रही ! पहले तुम्हें पाने की अब तुम्हें भुलाने की !!"
"कोशिशों के बाद भी जो पूरी न हो सकें ! तेरा नाम भी उन्हीं ख्वाहिशों में है !!"
ये दिन भी क़यामत की तरह गुज़रा है ! न जाने क्या बात थी हर बात पर रोना आया !!"
"भूलने वाली बातें याद हैं ! इसलिए ज़िन्दगी में विवाद है !!"
"ज़िन्दगी में मंज़िले तो मिल ही जाती हैं ! लेकिन वो लोग नहीं मिलते जिन्हें दिल से चाहा हो !"'
"हमें पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो ! हमारा शहर तो बस यूंही रास्ते में आया था !!"
"नाज़ुक लगते थे जो लोग ! वास्ता पड़ा तो पत्थर के निकले !!"
मेरी हर आह ! के बदले वाह ! मिली है मुझको ! कौन कहता है कि दर्द बिकता नहीं !!"
"निकाल दिया उसने मुझे अपनी ज़िन्दगी से भीगे कागज़ की तरह ! न लिखने के क़ाबिल छोड़ा न जलने के !!"
"सूखे पत्ते की तरह थे हम ! किसी ने समेटा भी तो सिर्फ जलाने के लिए !!"
"उम्मीद से बढ़कर निकली तुम तो ! मैंने तो सोचा था दिल ही तोड़ोगी तुमने तो मुझे ही तोड़ दिया !!"
"वो किताबों में लिखा नहीं था ! जो सबक़ ज़िन्दगी ने सिखाया मुझे !!"
सफर ज़िन्दगी का ज़रा छोटा था उसके साथ ! पर वो शख्स एक याद सा हो गया पूरी ज़िन्दगी के लिए !!"
लोग हमेशा गलत इंसान से धोखा खाने के बाद ! अच्छे इंसान से बदला लेते हैं !!"
नादान हैं वो लोग जो इश्क़ नहीं करते ! अरे ! जिगरा चाहिए बर्बाद होने के लिए !!"
इतनी बदसलूकी न कर ए ज़िन्दगी ! हम कौन सा यहाँ बार बार आने वाले हैं !!"
हुस्न वाले जब तोड़ते हैं दिल किसी का ! बड़ी मासूमियत से कहते हैं मजबूर थे हम !!
दर्द कम नहीं हुआ है मेरा ! बस सहने की आदत हो गयी है !!"
"यही सोचकर सफाई नहीं दी हमने ! इल्ज़ाम भले ही झूठे हैं पर लगाए तो तुमने हैं !!"
"क्या फायदा है अब रोने से ! जो प्यार न समझा वो दर्द क्या समझेगा !!"